Thursday, August 18, 2011

चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ....

चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ,
और मेरा दर्द भी संग चल रहा।
चोट खाकर राह में अवरोध से,
आह भी संताप संग घुल गल रहा।

दिख रही है सामने परछायी सी,
नैन तट पर तम की बदली छायी सी,

मिल रहा है भ्रम का साया नया,
लग रहा है झूठा नभ और जहाँ।

खो रही है हाथ की लकीरें,
बुझ रहा है मन दीप धीरे धीरे।

लौ से ही तो आज रौशन,
चाहतों का ये दीया।

चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ,
और मेरा दर्द भी संग चल रहा।

दूर जैसे गा रही है गायिका,
पास अपने बुला रही है नायिका,
सोचता हूँ क्या करुँ,क्या ना करुँ?
बूँद बिन सावन भी तो है फीका।

छोड़ दूँ मै या खुद को सौंप दूँ,
हाथ उनके जो है मद की प्यालियाँ,
या लगा लूँ होंठ से मै फिर उन्हें,
डूब कर मैने है सब कुछ पा लिया।

चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ,
और मेरा दर्द भी संग चल रहा।

टीस है खुद में कि तुमको देख लूँ,
आखिरी जो क्षण है जीवन का मिला,
प्यार दे दूँ इस कदर फिर से तुम्हें,
भूल जाओ बीता हुआ शिकवा गिला।

यूँ लगा लूँ आज मै अपने गले,
स्नेह का उर से हो उर में मिलन,
दो घड़ी बस संग तेरे आज मै,
सौ जन्म से भी है ज्यादा जिया।
चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ,
और मेरा दर्द भी संग चल रहा।

याद के उस शून्य पर है आज भी,
प्यार का अपना सितारा टूटता,
माँगता हूँ फिर से वो तमाम रात,
दर्द का ये किस्सा पल पल छूटता।

अब नहीं चाहूँ जहाँ की उर्मिया,
और ना ही राह में प्रकाश का दीया,
माँगता हूँ मै तो बस अपने खुदा से,
लौटा दे वो पल जिसे तूने लिया।

चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ,
और मेरा दर्द भी संग चल रहा।

17 comments:

SANDEEP PANWAR said...

बेहतरीन रचना,

Dr (Miss) Sharad Singh said...

मिल रहा है भ्रम का साया नया,लग रहा है झूठा नभ और जहाँ...

बहुत संवेदनशील रचना.

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ी ही भावपूर्ण रचना।

vidhya said...

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

Sushil Bakliwal said...

उत्तम भावप्रधान रचना.

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर...

इसे भी देखें-
एक 'ग़ाफ़िल' से मुलाक़ात याँ पे हो के न हो

Shalini kaushik said...

अब नहीं चाहूँ जहाँ की उर्मिया,और ना ही राह में प्रकाश का दीया,माँगता हूँ मै तो बस अपने खुदा से,लौटा दे वो पल जिसे तूने लिया।
चल रही है दर्द की कुछ आँधियाँ,और मेरा दर्द भी संग चल रहा।
बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति सत्यम जी.चित्र भी आपके मन के भावों को खूबसूरती से अभिव्यक्त कर रहे हैं .सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति.

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा रचना....

sushmaa kumarri said...

बेहतरीन अभिवयक्ति....

Dr Varsha Singh said...

बहुत सशक्त प्रस्तुति।

Anupama Tripathi said...

bhavnatmak ...samvedansheel......bahut sunder rachna..

Anupama Tripathi said...
This comment has been removed by the author.
Anupama Tripathi said...

कल-शनिवार 20 अगस्त 2011 को आपकी किसी पोस्ट की चर्चा नयी-पुरानी हलचल पर है |कृपया अवश्य पधारें.आभार.

सु-मन (Suman Kapoor) said...

dard bhari rachna par hai bahut sundar..

पूनम श्रीवास्तव said...

satyam ji
bahut hi behtreen vbhav bhini prastuti.
shbdo ka samanjasy to hamesha ki tarah bahut hi sundar.
manko bhigoyi is rachna ke liye
bahut bahut badhai
poonam

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत रचना ...भावपूर्ण

Maheshwari kaneri said...

सुन्दर प्रस्तुति....