Wednesday, May 11, 2011

सेमेस्टर का प्यार


"इंजीनियरींग लाईफ का लास्ट सेमेस्टर भी खत्म हो गया है...अब बस चंद दिनों में ये मस्ती के किस्से भी गुजरे जमाने हो जायेंगे...आज आप सब के सामने एक ऐसी रचना जो प्रेम के रंगों के संग ही हर सेमेस्टर की मेरी यादों को समेटे है...."

आँखे मिली,मन घबराया,
दिल धड़का फिर उसको पाया।
वो नयी नयी सी लगे मुझे,
न जाने क्यों हर बार?

मेरी तमन्ना,मेरी ख्वाहिश,
मेरे सेमेस्टर का प्यार।

नया मौसम है बड़ा सुहाना,
रोज होता अब आना जाना,
राहों में उसके पीछे,
खड़ा रहता घर के निचे।

भाई से उसके लगी मुझे है,
आज बड़ी ही मार।

दर्द में भी इक मजा है,
मेरे सेमेस्टर का प्यार।

मोबाईल मेरा रहता था गुमशुम,
अब बजता है हर दम टुन टुन,
मैसेज पैक भरवाना है,
रीचार्ज भी करवाना है।

बातें होगी लम्बी लम्बी,
सूरज,चाँद,सितारों की,
टाईम पास की ये गठबंधी,
सूने आँगन में बहारों की।

बात करते करते जागा मै,
आज भोर के चार।
रात रँगीला,दिन सुहाना,
मेरे सेमेस्टर का प्यार।

कोर्स के बुक मै ना पढ़ता अब,
मै पढ़ता हूँ लव स्टोरी,
प्रैक्टिकल में ना समय गँवाता,
रटता लव की अटरेक्सन थ्योरी,

C++ के प्रोग्राम को,
कम्पाईल बिना ही रन करता,
देख के उसकी कातिल अदाएँ,
प्वाईजन बिना ही मै मरता।

तन के गर्म हुए बिन ही,
चढ़ा मुझपे लव का बुखार।

एक दवा है या मर्ज है,
मेरे सेमेस्टर का प्यार।

ख्याल उसका आँखों में हर दम,
बिन बादल ही बारिश झम झम,
फोन लगाता जब उसको मै,
वो करती है बाते अब कम।
लगता है मै हो गया लाईन में पिछे,
कोई और है अब उसका बलम।

खाना भूला,पीना भूला,
जीवन से गया मै हार,
बेदर्दी और बेवफाई ही तो है,

मेरे सेमेस्टर का प्यार।

इक्जाम की टेनसन,
और मेरा गुमशुम मन,
बिन प्यार के हुआ दिल,
बिल्कुल खाली उजड़ा चमन।

बहारों का मौसम न जाने कब आयेगा,
कोई जो मुझको फिर आवाज लगायेगा।

ढ़ुँढ़ुगा उसे फिर यहाँ वहाँ,
वो प्यार नया फिर होगा जवाँ,
पता नहीं ये कौन सी बारी,
पर होगा मेरा पहला प्यार।

बीति बातों सी हुई कल की,
मेरे सेमेस्टर का प्यार।

नई कहानी,मेरी जुबानी,
मेरे प्यार की मुझसे मनमानी।

कल होगी फिर इक अकेली,
नेक्सट सेमेस्टर की नई नवेली।
इजहारे मुहब्बत करेंगे हम,
बिन प्वाईजन के फिर मरेंगे हम।

फिर होंगे सेमेस्टर के क्लास,
नया चेहरा फिर मुझको रास,
फिर मै उसपर फिदा होऊँगा,
इस बार तो पूरा जुदा होऊँगा।

खत्म होंगे क्लास,खत्म होगा सेमेस्टर,
बस जुड़े रहेंगे दिल के तार।

याद आयेगा फिर गिन गिन कर मुझको,
मेरे सेमेस्टर का प्यार........।

18 comments:

रश्मि प्रभा... said...

is rachna ko mail karen rasprabha@gmail.com per taki yaad rahe sabko

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Satyam bhai aapne Gazab dha diya. Mast rachna, Badhayi.

............
तीन भूत और चार चुड़ैलें।!
14 सप्ताह का हो गया ब्लॉग समीक्षा कॉलम।

artijha said...

waah kya likha hai shtyam ji ...bahut lajabab...waah waah..man khush hua...

kshama said...

Hmmmmm! Aisa bhee hota hai!

वन्दना said...

वाह …………।बहुत सुन्दर्।

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (12-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

संजय भास्कर said...

तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

प्रवीण पाण्डेय said...

सेमेस्टरों के पग बढ़ाती हमारी जिन्दगी। बहुत याद आते हैं वे आठ सेमेस्टर।

Dr Varsha Singh said...

आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है। शुभकामनायें।

राज भाटिय़ा said...

वल्ले वल्ले जी बहुत सुंदर रचना,

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Kai saare technical shabd hain is semester ke pyar ki rachna ....achcha laga padhkar...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सेमेस्टर दर सेमेस्टर पींगे बढाता प्यार ...अच्छी रचना

Manav Mehta said...

waah ji waah....kya pyaar bahri rachna hai..

***Punam*** said...

सेमेस्टर का प्यार...

बहुत खूब..!!

mridula pradhan said...

wah.kya baat hai.

Er. सत्यम शिवम said...

ब्लागर में हुये परेशानी की वजह से आपके अनमोल कुछ कामेन्ट डिलीट हो गये..पर आशा करता हूँ कि आपसब का आशीर्वाद तो बना ही हुआ है.....बहुत बहुत धन्यवाद।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत सुन्दर शब्दचित्र उकेरा है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

Mani Singh said...

collage ki padhai v yuva dil ki soch ko sath me ukera hai aapne

Nitish Tiwary said...

bahut sundar
aap sabhi ka hardik swagat hai mere blog par
iwillrocknow.blogspot.in