Tuesday, March 8, 2011

विचारों का घर

आज कुछ अलग अंदाज में लिखने की कोशिश की मैने।अपनी कल्पनाओं और विवशताओं को मूर्त स्वरुप दिया है मैने "विचारों के घर में"।
                                कैसा है मेरे "विचारों का घर"......?


मेरे विचारों के घर के,
कोणे वाले उस कमरे में,
अब भी मेरी दो रचनायें,
वैसे ही टँगी हुई है।
दीमक लग रहे है उनपे,
अक्षर मीट रहे है धीरे धीरे,
धूमिल हो रहा है यादों का खजाना,
और गुमशुम से वे दोनों प्रतीक्षारत है।

 पहले कभी कभी मै और मेरी लेखनी,
विचारों के घर के,
कोणे वाले उस कमरे में,
टँगी उन दो रचनाओं से मिल आते थे।

पूछते थे कैसे हो तुम,
क्या ये खामोशी अच्छी लगती तुम्हें।

और बिन कहे उनसे उन्ही के,
कुछ अक्षर चुरा लाते थे,
और मेरी डायरी के पन्नों में,
उकेर देते थे।

पर अब जब से मेरी लेखनी,
भूल गई है वो रास्ता,
जिससे मेरे विचारों के घर के,
कोणे वाले उस कमरे में,
टँगी उन दो रचनाओं से मिलने जाया जाता था।

तब से बेअसर होकर,
न जाने क्यों बस ढ़ुँढ़ती है अब,
उन राहों को।

विचारों का घर न जाने कबसे,
वैसे ही बंद पड़ा है,
और कोणे वाले उस कमरे में,
टँगी दो रचनायें न जाने किस हाल में है।

वो दो रचनायें,जिनमें एक रचना,
मेरी कल्पनाओं का आकाश समेटे हुए है,
और दुसरी मेरे विवशता का मूर्त स्वरुप।
अपने विचारों के घर से बेदखल,
मेरी लेखनी अब तो ना ही,
स्वच्छंदता से कल्पनाओं के आकाश में,
उड़ ही पाती है और न तो,
अपनी विवशता को शब्दों में गढ़ पाती।

अब तो बस कोरे कागजों पर,
निरर्थक अक्षरों को उकेरती रहती है।

चाह कर भी मै और मेरी लेखनी,
मेरे विचारों के घर के,
कोणे वाले उस कमरे में,
टँगी हुई मेरी उन दो रचनाओं से,
मिल नहीं पाती है।

और उन दो रचनाओं के गुम होने से,
मानों मेरा पूरा जीवन ही बेवजह सा गुजरता है अब।

12 comments:

डॉ. पूनम गुप्त said...

बहुत खूब !
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आपका बहुत -बहुत धन्यवाद .

Roshi said...

sunderta se shabdo mein piroya hai

प्रवीण पाण्डेय said...

रचनायें खो जाने का दुख, लगता है किसी ने सृजनात्मकता अपहृत कर ली।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बड़े अलग से मनोभाव ....सुंदर

रचना दीक्षित said...

सुंदर प्रस्तुति.

Dr Varsha Singh said...

सुंदर विचार। गहन चिन्तन के लिए बधाई।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर रचना!

sagebob said...

बहुत ही सुन्दर रचना.
सलाम.

Dinesh pareek said...

बहुत ही सुन्दर वचन आपकी जितनी तारीफ करू उतनी कम है जी |
आप मेरे ब्लॉग पे भी देखिये जीना लिंक में निचे दे रहा हु |
http://vangaydinesh.blogspot.com/

Er. सत्यम शिवम said...

आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद।

Vijay Kumar Sappatti said...

amazing expressions bhai