Sunday, June 5, 2011

फिर नया आगाज कर ले

जिंदगी की इस सफर में,
फिर नया आगाज कर ले।
दब गयी जो साँस मन में,
एक नया आवाज भर ले।

देख ले दुनिया को,
फिर हम खूबसुरत नया नया सा,
फिर किसी की चाहतों के वास्ते,
जी ले और मर ले।

जिंदगी की इस सफर में,
फिर नया आगाज कर ले।

टुट कर बिखरोगे जो तुम,
क्या मिलेगा टुटने पर,
तुम ही होगे कल के सपने,
टुटते को जोड़ दो गर।

इसलिए हे पथिक! मत थक,
दूर तक तू हँस के चल ले।

जिंदगी की इस सफर में,
फिर नया आगाज कर ले।

कल तू क्या था वो पुरानी बात हो चुकी है,
सर झुकाता था जहाँ तू,
वो सर आज तेरे सामने झुकी है।

वक्त का है खेल सारा,
जिसने है सब कुछ सीखाया,
दौड़ कर तू राह में,
फिर वक्त के पंजों को धड़ ले।

जिंदगी की इस सफर में,
फिर नया आगाज कर ले।

17 comments:

शालिनी कौशिक said...

जिंदगी की इस सफर में,
फिर नया आगाज कर ले।
[Image]दब गयी जो साँस मन में,
एक नया आवाज भर ले।
satyam ji prastut kavita me aapki lekhni me aur bhi nikhar aa gaya hai aur yah man ke bhavon ko bahut hi khoobsoorti se varnit kar rahi hai.badhai.

रश्मि प्रभा... said...

टुट कर बिखरोगे जो तुम,
क्या मिलेगा टुटने पर,
तुम ही होगे कल के सपने,
टुटते को जोड़ दो गर।
waah

प्रवीण पाण्डेय said...

हर पल हो एक नया प्रारम्भ।

Mani Singh said...

vakat kaa hai khel sara bahut khub kaha aapne

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

दब गयी जो साँस मन में,
एक नया आवाज भर ले।
bahut sundar abhibykti
bahut -bahut badhai
sadar
LAXMI NARAYAN LAHARE

Anita said...

आशा और विश्वास जगातीं सुंदर पंक्तियाँ ! आभार!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 07- 06 - 2011
को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सुंदर भाव ....जीवन का हर लम्हा नयी सोच के साथ जीयें....

वाणी गीत said...

टूट कर बिखरना कौन बड़ी बात है
बात तब है जब टुकड़े जोड़े जाएँ ...
आत्मविश्वास और उत्साह से लबरेज़ सुन्दर कविता ...
यही विश्वास बना रहे !

udaya veer singh said...

marmik ,mohak rachana bodhgamya hai -
sadhuvad ji .

सुलभ said...

फिर नया आगाज कर ले।

PRERNA DETI SUNDAR RACHNA.

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत लाजवाब रचना .. भावनाओं भरी ....

रंजना said...

उत्साह और उर्जा बिखेरती प्रेरक रचना...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

अच्छी , प्रेरक रचना.

Vivek Jain said...

टुट कर बिखरोगे जो तुम,
क्या मिलेगा टुटने पर,
तुम ही होगे कल के सपने,
टुटते को जोड़ दो गर।

सुन्दर
बधाई हो आपको - विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Priyankaabhilaashi said...

ऊर्जावान..प्रेरणादायक..!!!!