कसक है आज भी दिल में दबी,
उस रात की कोई।
तुम्हारे पास होकर भी,
मै तुमको छू न पाया था।
मेरा दिल चाहता था खुद में यूँ भर लूँ मै तुमको आज,
मगर अफसोस मैने हर पल तुमको गवाँया था।
नशा वह रात में था,
या तुम्हारी बात में था,
जो मुझको खींच कर बेसुध बना,
तेरे पास लाया था।
कसक है आज भी दिल में दबी,
उस रात की कोई।
तुम्हारे पास होकर भी मै तुमको छू न पाया था।
बहुत अरमान थे जिनको था पाला,
लम्बे अरसे से,
वही कुछ बोल मेरी आँखों से,
उस रात बरसे थे।
कभी सोचूँ जो तुमको पाने का,
यह ख्वाब है या सच।
नहीं थी तुम कही भी,
बस अंधेरे में मेरा ही साया था।
कसक है आज भी दिल में दबी,
उस रात की कोई।
तुम्हारे पास होकर भी मै तुमको छू न पाया था।
अभी तो रात की सारी कहानी,
पूरी बाकी है।
फलक पर चाँद भी शायद,
अभी अभी ही आया है।
मोहब्बत की कहानी चाँद की थोड़ी पुरानी है,
यही सोचकर मैने नया किस्सा बनाया है।
अधूरा है तेरे बिन,
मेरा होना या ना होना।
तुम्हारे ना होने के एहसास ने,
फिर क्यों मुझको रुलाया था।
कसक है आज भी दिल में दबी,
उस रात की कोई।
तुम्हारे पास होकर भी मै तुमको छू न पाया था।
कहूँगा तो हँस दोगी,
कहोगी झूठे हो।
मगर हर रात यूँ ही जाग कर,
मै भोर करता था।
तुम्हारी यादों से लड़ कर जो,
मेरी हालत होती थी,
तन जिंदा होता था,
बेचारा मन बस मरता था।
सुनोगी तुम नहीं जिस गीत को,
मै जानता था पर।
वही इक गीत मैने हर रात,
क्यों तुमको सुनाया था।
कसक है आज भी दिल में दबी,
उस रात की कोई।
तुम्हारे पास होकर भी मै तुमको छू न पाया था।
































