Thursday, April 7, 2011

तुम हो अब भी

मौन मेरा स्नेह अब भी,
जो दिया,तुमसे लिया मै।
प्यार मेरा चुप है अब भी,
क्यों किया,जो है किया मै।

भूल से हुई इक खता,
मैने रुलाया खूब तुमको,
खुद भी रोया,
कह ना पाया,
नैना मेरे ढूंढें उनको।

तुम कही हो,मै कही हूँ,
तुम ना मेरी,मै नहीं हूँ।

पर है वैसा ही सुहाना,
प्यार का मौसम तो अब भी।

साथ तेरा छोड़ दामन,
प्यार का बंधन छुड़ाया,
रुठ चुकी है खुशियाँ अपनी,
प्यार हमारा लुट न पाया।

ख्वाबों में फिर हर रात ही,
न जाने क्यों आती हो तुम तो अब भी।

राहे मुझसे पुछती है,
है कहा तेरा वो अपना,
साथ जिसके रोज था तू,
खो गया क्यों बन के सपना।

तू गया है भूल या उसने ही दामन है चुराया,
पर मेरे जेहन में वैसी ही,
कुछ प्यारी यादें सिमटी है अब भी।

माना है मैने कि तुम हो दूर मेरे,
दूर हो के पास हो तुम साथ मेरे।

मै तुम्हे अब देखता हूँ आसमां में,
चाँद में,तारों में,
हर जगह जहाँ में।

सब में बस तेरी ही तस्वीर दिखती,
हर तस्वीर तुम्हारी है ये पूछती।

मै नहीं तेरी प्रिया कर ना भरोसा,
दूर रह वरना तू खायेगा फिर धोखा,
मै उन्हें बस ये ही कह के टालता हूँ,
साये से तेरा अपना वजूद निकालता हूँ।

कोई ना जाने किसी को क्या पता है?
मेरे दिल के घर में तो तुम हो अब भी।
बीती हुई हर बात में,
अपनी सभी मुलाकात में,
थे चंद सपने जो थे जोड़े तेरे मेरे साथ ने।

उन चाँदनी हर रात में,
भींगी हुई बरसात में,
मेरे आज में और कल में,

दबा-दबा सा जिक्र तुम्हारा,
एहसास दिलाता कि तुम हो अब भी।

21 comments:

Amrita Tanmay said...

Dba-dba sa jikra tumhara ....khubsurar panktiyan..behad khubsurat rachana

शिवा said...

मैने रुलाया खूब तुमको,
खुद भी रोया,
कह ना पाया,
नैना मेरे ढूंढें उनको।
वाह - वाह क्या बात है सत्यम जी बहुत सुंदर कविता , दिल को छू गई आपके कविता .

mridula pradhan said...

behad achchi lagi....khask Dba-dba sa jikra tumhara .......

vandan gupta said...

एहसासो मे रहने वाले कब जुदा होते हैं आस पास ही होते हैं।

प्रवीण पाण्डेय said...

एक धुंधला एहसास, किसी के होने की आस, अपनेपन का विश्वास, इसी से जीवन बढ़ रहा है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

प्रेम पगी अच्छी रचना .

Manpreet Kaur said...

गहरे एहसास से भरा पोस्ट !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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मनोज कुमार said...

मन के भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति।

Vivek Jain said...

बहुत ही सुंदर ! मजा आ गया!
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

वाणी गीत said...

दबा दबा सा एहसास दिलाता याद की तुम हो अब भी ..
खूबसूरत एहसास !

Dr (Miss) Sharad Singh said...

सुन्दर चित्रसंयोजन...
बहुत ही सुंदर कविता और
बहुत ही गहरे भाव !

Arti Raj... said...

jitni baar aapko padhti hu..utni baar kucchh naya nikal ke aata hai...itni gehrai se likh lena aasan nhi hota......likhte rahiye...bhut acchha lga...

hamarivani said...

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

Anupama Tripathi said...

निश्छल प्रेम में डूबी हुई कुसुमित अनुभूति .....!
बहुत सुंदर एहसास ...
सुंदर रचना ..

ZEAL said...

Beautiful and romantic creation ...lovely !

Sadhana Vaid said...

हृदय के कोमल भावों की बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ! प्रेम रस में पगी बेहतरीन रचना ! बधाई !

Kailash Sharma said...

राहे मुझसे पुछती है,है कहा तेरा वो अपना,साथ जिसके रोज था तू,खो गया क्यों बन के सपना।...

अंतस की कसक और भावों का बहुत सुन्दर चित्रण..रचना मन को छू जाती है..बहुत सुन्दर

Sushil Bakliwal said...

प्यार का गहराता अहसास.
खूबसुरत प्रस्तुति..

Dr Varsha Singh said...

मौन मेरा स्नेह अब भी,
जो दिया,
तुमसे लिया मै।
प्यार मेरा चुप है अब भी,
क्यों किया,
जो है किया मै।
भूल से हुई इक खता,
मैने रुलाया खूब तुमको,
खुद भी रोया,
कह ना पाया,
नैना मेरे ढूंढें उनको।

मनोभावों को खूबसूरती से पिरोया है। बधाई।

संजय भास्‍कर said...

सत्यम जी बहुत सुंदर कविता , दिल को छू गई आपके कविता .

संजय भास्‍कर said...

कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका