Tuesday, April 26, 2011

तुम आओ ना....

स्नेह के अश्रु भर दो नैनों में,
ऐसे तो ठुकराओ ना,
इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।
तुम आओगी जब लेकर बहारे,
यादों के किस्से होंगे प्यारे प्यारे,
ह्रदय का हर्ष और स्नेह मिलन की,
छा जायेंगे राहों में संग तुम्हारे।

कही नैन मेरे थक कर देखो,
सपनों के नगर में खो जाये ना।

इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।

तुमको क्या पता दीवानापन,
बेचैन है कितना मेरा मन,
हँसना तो बस मजबूरी है,
रोना ही तो है सारा जीवन।

एकांत का गीत मै गाऊँ कब तक,
तुम भी आकर संग गाओ ना।

इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।

आज फिर वैसी ही रात है,
मानों तुमसे मेरी मुलाकात है,
तुम दूर खड़ी रोती रहती,
कुछ दिल ही दिल की बात है।

राहों में अभी तक तन्हा हूँ,
तुम मेरा साथ निभाओ ना।

इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।

छुपा लिया मैने तुमसे,
वो बातें जो तुमसे कहनी है,
दिल ने पूछा दिल से तेरे,
दिल में तेरे मुझे रहनी है।

देकर थोड़ा सा प्यार मुझे,
अपने कल को भूल जाओ ना।

इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।
है प्यार नहीं तो ये क्या है,
मेरे दर्द के किस्सों का मंजर,
हर जख्म होगा अब बेगाना,
इक बार जो तुम आओगी अगर।

मै राह तुम्हारी देखते ही,
अपनी राहें सब भूल गया,
मँजिल भी तो अब तुम ही हो,
तेरे इंतजार के सिवा अब और क्या?

अंतिम साँसों की धुन पर,
ये मन बेचारा बुला रहा,
अब तो बस दिल की थमती धड़कन,
को और ना तुम धड़काओ ना।

इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।

तुम आओ ना,तुम आओ ना......।

14 comments:

रश्मि प्रभा... said...

अंतिम साँसों की धुन पर,ये मन बेचारा बुला रहा,अब तो बस दिल की थमती धड़कन,को और ना तुम धड़काओ ना।...
bahut badhiyaa

Arti Raj... said...

ab kaise bhi aaona...bahut sudar shirshak..or utni sunadr barnan..

vandan gupta said...

बहुत सुन्दर भावनायें।

संध्या शर्मा said...

कैसे भी तुम आओ ना...
बहुत खूब... हर पंक्ति अपने आप में गहरे अहसास समेटे है ....

सु-मन (Suman Kapoor) said...

bahut sundar..mann ki pukaar...

दर्शन कौर धनोय said...

केसे भी तुम आ जाओ न ?
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है अपनी प्रियतमा को पास बुलाने की ..

Kavita Vachaknavee said...

लिखते रहें निरंतर.
समस्त शुभकामनाएँ.

डॉ. मोनिका शर्मा said...

सुंदर ...प्यारी कविता ......मनोभावों का बेहतरीन चित्रण

वैज्ञानिक प्रार्थना said...

"हम में अधिकतर लोग तब प्रार्थना करते हैं, जबकि हम किसी भयानक मुसीबत या समस्या में फंस जाते हैं| या जब हम या हमारा कोई किसी भयंकर बीमारी या मुसीबत या दुर्घटना से जूझ रहा होता है तो हमारे अन्तर्मन से स्वत: ही प्रार्थना निकलती हैं| क्या इसका मतलब यह है कि हमें प्रार्थना करने के लिये किसी मुसीबत या अनहोनी के घटित होने का इन्तजार करना चाहिए!"

"स्वस्थ, समृद्ध, सफल, शान्त और आनन्दमय जीवन हर किसी का नैसर्गिक (प्राकृतिक) एवं जन्मजात अधिकार है| आप इससे क्यों वंचित हैं?"

एक सही ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ का चयन और उसका अनुसरण आपके सम्पूर्ण जीवन को बदलने में सक्षम है| जरूरत है तो बस इतनी सी कि आप एक सही और पहला कदम, सही दिशा में बढाने का साहस करें|

"सफल और परिणाम दायी अर्थात ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ का नाम ही- "कारगर प्रार्थना" है! जिसका किसी धर्म या सम्प्रदाय से कोई सम्बन्ध नहीं है| यह प्रार्थना तो जीवन की भलाई और जीवन के उत्थान के लिये है| किसी भी धर्म में इसकी मनाही नहीं है|"

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुन्दर कविता, धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत कोमल सी भावनाओं को प्रेषित किया है ....सुन्दर रचना

संजय भास्‍कर said...

मनोभावों का बेहतरीन चित्रण
....वाह..क्या खूब लिखा है आपने।

प्रवीण पाण्डेय said...

इतना मन तुममें डूबा है, कैसे भी तुम आओ न।

Anupama Tripathi said...

प्रेम मय मन से भावनाएं बह निकली हैं ....!!
bahut sunder geetika ..!!