Saturday, July 9, 2011

यह रात फिर नहीं आयेगी

यह रात फिर नहीं आयेगी,
वो बात फिर नहीं आयेगी।
कितना भी अँधेरा हो जाये,
काजल से कालिमा चुन लाये,
काले घनघोर बादलों से,
बरसात फिर नहीं आयेगी।

यह रात फिर नहीं आयेगी।

यह रात नहीं है बात है प्रिय,
तेरे मेरे अंतरमन का,
तेरा,मेरे होने का क्षण,
मिलन है दोनों के तन का।

घुल कर यह निशा का गीत,
प्रणय के गीत फिर वही गायेगी।

यह रात फिर नहीं आयेगी।

गुमसुम सा अकेला मेरा मन,
तेरे मन से मिला अपनापन,
साथी की जरुरत थी मुझको,
पूरा हुआ मै,तेरा बन।

अब नहीं जरुरत मुझे किसी की,
जब तू,मेरे संग आयेगी।

यह रात फिर नहीं आयेगी।

कुछ ऐसी हलचल सी है जो,
लहराती है,बलखाती है,
हवाओं के संग यादें तेरी,
अब आती है और जाती है।

शंका है हवाओं को भी क्या,
इस बार तुम्हें छू पायेगी।
यह रात फिर नहीं आयेगी।

जैसे-जैसे ढ़लती ये रात,
मन के तरंग में झंकार उठे,
कही दिन की उलझन में खोकर,
मन से मन का ना तार टूटे।

एक बार पड़ गयी गाँठ तो क्या,
फिर प्रीत की डोर जुड़ पायेगी।

यह रात फिर नहीं आयेगी।

16 comments:

vidhya said...

बहुत ही सुन्दर

Roshi said...

sunder a,tyant sunderbhav

दर्शन कौर धनोए said...

कभी एक पुरानी रहस्य मई फिल्म देखि थी 'ये रात फिर नही आएगी ' आज आपकी कविता ने वो फिल्म याद दिला दी ..बहुत सुंदर सत्यम !

शालिनी कौशिक said...

अब नहीं जरुरत मुझे किसी की,जब तू,मेरे संग आयेगी।
sahi kah rahe hain satyam ji.hriday ki bhavnaon ko bahut gahrai se likh rahe hain sundar prastuti.badhai.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

एक बार पड़ गयी गाँठ तो क्या,
फिर प्रीत की डोर नहीं जुड़ पायेगी।

बहुत बढ़िया प्रभावित करती रचना .....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

भावों से सजी सुन्दर रचना और उतने ही सुन्दर चित्र

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (11-7-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

दिगम्बर नासवा said...

भाव मई प्रस्तुति ...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आपकी एक पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही सुंदर अभिवयक्ति.....

प्रवीण पाण्डेय said...

चार पल मिले तो आज...

संजय भास्कर said...

वाह कितना सुन्दर लिखा है आपने, कितनी सादगी, कितना प्यार भरा समर्पण जवाब नहीं इस रचना का........ बहुत खूबसूरत.......

संजय भास्कर said...

अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
हार्दिक शुभकामनायें !

JHAROKHA said...

satyam ji
pata nahi kyon aapki nai post khul nahi rahi hai .
aapki yah kavy -kalpana mujhe bahut bahut pasand aai---

एक बार पड़ गयी गाँठ तो क्या,
फिर प्रीत की डोर नहीं जुड़ पायेगी
preet ki ganth bahut hi majbut bandhano me bandhi hoti hai yah itni aasani se nahitutai---
bahut hi sundar prastuti
bahut bahut badhai
poonam

Priyankaabhilaashi said...

सुन्दर..!!!