Tuesday, July 26, 2011

मै साँवला क्यों हूँ?

माँ मुझे तू आज बता दे,
मै साँवला क्यों हूँ?
काले मेघ सा है रंग निखर,
हूँ कृष्ण सा ही मै मनहर,
नैनों की शोभा काजल सा,
मै बावला क्यों हूँ?

माँ मुझे तू आज बता दे,
मै साँवला क्यों हूँ?

पनघट पे मै भी जाता हूँ,
पर कृष्ण सा हर्ष ना पाता हूँ,
अपनी ये रंगत धो लूँगा,
नदियों में मै नहाता हूँ।

सारी ग्वालिने चिढ़ाती है,
गोपियाँ आईना दिखाती है,
सारे लोग मुझसे पूछते है,
मै साँवला क्यों हूँ?

माँ मुझे तू आज बता दे,
मै साँवला क्यों हूँ?

साँवला होना क्यों बुरा है,
ये बात समझ नहीं आती है,
ये साँवला सा रंग मेरा,
मुझे रंगभेद सिखाती है।

राम,कृष्ण भी तो साँवले थे,
पर सब को वो तो प्यारे थे,
फिर मुझको क्यों सब कहते,
मै साँवला क्यों हूँ?
माँ मुझे तू आज बता दे,
मै साँवला क्यों हूँ?

बगिया में अब ना जाऊँगा,
ना ही बंशी बजाऊँगा,
अपने आँचल में छुपा ले मुझे,
वरना मै जी ना पाऊँगा।

जमाने के लिए मै साँवला हूँ,
पर तेरा सलोना लाडला हूँ,
फिर मुझसे सब क्यों पूछते है,
मै साँवला क्यों हूँ?

माँ मुझे तू आज बता दे,
मै साँवला क्यों हूँ?

21 comments:

शालिनी कौशिक said...

bahut khooob kaha.

शालिनी कौशिक said...

iska to radha ji ke shabdon me yahi hai ki ''jag se nirala''sahi hai na isliye is par kya dukh manana.sundar prastuti .badhai satyam ji.

कविता रावत said...

माँ मुझे बता दे तू
मैं सांवला क्यूँ हूँ!
... बाल मन की कोमल भाव को बहुत खूबसूरती से उकेरा है आपने!

मेरी बेटी गोरी है लेकिन बेटा सांवला है उसको भी जब बहुत लोग यूँ ही उसके काले होने का अहसास दिलाते है.. कोई कहेगा फिअर एंड लविली तो कोई पावडर मलकर गोरा दिखने के लिए कहता है तो उसे बहुत बुरा लगता है ...मैं भी लोगों को टोकती हूँ की आप भले ही मजाक करते हूँ लेकिन बच्चे के मन में अगर यह बात पैठ गयी तो फिर क्या होगा... आपकी यह रचना पढ़कर लगा जैसे यह सवाल वह खुद मुझसे कर रहा है...आभार!

प्रवीण पाण्डेय said...

राधा गोरी न होती तो संभवतः न खलता।

kshama said...

Bahut,bahut pyaaree rachana hai!

vidhya said...

Bahut,bahut pyaaree rachana hai!

Roshi said...

bahut hi sunder............

रेखा said...

बहुत ही प्यारी रचना . प्रभु का स्मरण होता है.

सुमन'मीत' said...

pyari c kavita ..pyare se bhav liye...

Manish Kr. Khedawat said...

superbbbbbbbbbbbbbb

sushma 'आहुति' said...

very nice...

रश्मि प्रभा... said...

लाडला तू मेरा जग से निराला ... इसीलिए काला

संध्या शर्मा said...

सांवला है तो क्या हुआ माँ का सलोना, लाडला तो है...
कोमल भाव, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

राज शिवम said...

श्याम वर्ण तो सृष्टि का एकमात्र सत्य है तभी तो सभी प्रेम मग्न होकर दौड़ पड़ते है श्याम और काली की ओर और जगत के परम माता पिता ने अपने नाम का प्रथम अक्षर "श"यानि शिव,"श"यानि शक्ति से जग में प्रसिद्ध हुए।हमारे साई भी "स" से साक्षात श्याम है।सुन्दर रचना,आशिर्वाद।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बच्चे के मन कि जिज्ञासा को बहुत खूबसूरत शब्द दिए हैं ...अच्छी प्रस्तुति

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बाल सुलभ भावों को कितनी सुन्दरता से बयां किया आपने....

सदा said...

वाह ...बहुत ही बढि़या ...।

रविकर said...

महा-स्वयंवर रचनाओं का, सजा है चर्चा-मंच |
नेह-निमंत्रण प्रियवर आओ, कर लेखों को टंच ||

http://charchamanch.blogspot.com/

संजय भास्कर said...

बहुत ही शानदार अभिब्यक्ति प्रस्तुत की है आपने।

संजय भास्कर said...

बहुत ही सरल शब्दों में अपनी बात कहती प्रस्तुति.

Mani Singh said...

bahut khooob kaha aapne