Tuesday, May 3, 2011

पहली रात की वो आखिरी बात

पहली रात की वो आखिरी बात,
प्रेमिका ने दी प्रेमी को सौगात!
प्रियतम मै तुम्हे प्यार करती हूँ,
जमाने से अब ना डरती हूँ,
मेरी मोहब्बत को तुम कुबूल करो,
अगर प्यार है तुम्हे भी तो हुजूर कहो!
चिलमन जो अँधेरा दूर करे,
इस रात की गलियारी में नूर भरे!
तुम भी मेरे अब साथ चलो,
प्रियतम मै तो कब से तुम्हारे साथ चलती हूँ,
राहों में ना फासलों से डरती हूँ!

आदिम रात्रि की वो महक,
खुशबु बन जेहन में भरने लगी,
मोहब्बत के किस्से सारे बाकी थे,
फिर दोनों को मदहोशी क्यों जकड़ने लगी!

प्रेमी बोला, तुम सो जाओ,
अब रात बहुत सा हो गया,
मुझे निंद कहा अब आयेगी,
जो दिल तुझमे ही खो गया!

यादों में ना ये रात खो जाए,
कोशिश करता हूँ रोक लूँ,
सारे लम्हें दिलों में ही कैद ना हो जाए!

तुम भी इस रात को जी लो ना,
प्रिया मै तो हमेशा से जगा हूँ,
तेरे नैनों की चँचलता से ठगा हूँ!
समय तो कभी ठहर ना पाया है,
जो ये मौसम भी बित गया,
सच कहता हूँ, दिलासा नहीं,
हमारा प्यार जो हमसे रुठ गया!

बाद में बडा़ पछताओगी,
इस रात की हर बात दुहराओगी,
बस अकेली तन्हा राहों में,
बार-बार मुझे आवाज लगाओगी!

मै ना आऊँ तो समझ लेना,
ये तो मेरी मजबूरी है,
अपना दिल तो है बिल्कुल भला,
ये दुनिया थोडी़ बुरी है!
तुम भी कभी याद कर लेना,
प्रिया मै तो हर साँस में तेरा नाम लिखुँगा,
तेरी मोहब्बत की ही माला जपूँगा!

मुझको भी तो जरा समझ लो ना,
प्रियतम मै तुम्हे कैसे भूल पाऊँगी,
तेरे हर गीत को गुनगुनाऊँगी!
इक रात की औकात ही क्या,
सारी जिंदगी तुमपे लुटाऊँगी!

तुम साथ होगे तो हर इक पल,
खुद ही खुबसूरत लम्हा बन जायेगा,
तेरे साथ बिताए हर इक कल,
यादों में कही खो जाएगा!

रुठुँगी मै तुम मना लेना,
गिर जाऊँ तो उठा लेना,
हर रात यूहीं जगते-जगते,
भोर हो जाए तो बता देना!

मै भी तो रात भर जागी हूँ,
प्रियतम मै तुम्हे कैसे सुला पाऊँगी,
जो निंद मुझे आ जायेगी!

कर लो जो बाते बाकी है,
चुपके से सुनो कदमों की आहट,
जो मुझे तेरे पास लाती है!
मुड़ के देखो मै हूँ ना,
बोलो अब क्या है डरना!

मै भी तो जरा सी भीगी हूँ,
प्रियतम तेरी आँसुओं की जो बरसात हुई है,
वो मेरी आँखों से भी आज हुई है!
थाम लो मुझे भर लो बाहों में,
ये रात गुजर ना जाए,
कही प्यार की इन्ही राहों में!
चलो कही दूर चले,
प्रिया मै तुम्हारे साथ रहूँगा,
तुम भी मेरा साथ दोगी ना!
इस जमाने से दूर जहाँ बस चाहत ही है,
वहाँ अपना बसेरा बना लेंगे,
तुम रहोगी और मै रहूँगा,
वहाँ दुसरे कोई भी ना रहेंगे!

वादियों में मोहब्बत जवाँ होगा,
हर रात पैदा नया अरमाँ होगा,
कारवाँ मोहब्बत का गुजरेगा जिधर,
सब देखेंगे दिल में प्यार होगा!

हम-तुम इक रात की बदौलत,
प्रेम के दो पंक्षी बनेंगे,
उड़-उड़ के सारी दुनिया में,
मोहब्बत के जगमगाते नूर सजेंगे!

पहली रात की वो आखिरी बात,
जिंदगी की हर बात बन जायेगी,
मोहब्बत के दीप जलेंगे तो,
अँधियारी भी उजाले की रोशनी लायेगी!

5 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर प्रेम प्राकट्य।

artijha said...

aesa lag raha tha mano main koi kahani padh rahi thi,,,,ek love story...very nice

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर यह प्रेम रचना

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब ...शुभकामनायें !

डा. श्याम गुप्त said...

अच्छी भाव रचना है...हा कव्य शिल्प सुधारना बाकी है....वास्तव में एक कथ्य व भाव की कविता इतनी लम्बी नहीं होनी चाहिये...ऊब होने लगती है, जैसा पान्डे जी ने कहा कहानी लगने लगती है...